कविता//तुझे जगाने आया हूं//गौरव झा
कविता-- तुझे जगाने आया हूं।
तुम कब तक मेरे राह में कांटा बुनने आओगे,ए दोस्त जिस पथ में बढ़ोगे,पहले मेरे ही पदचिन्हों को तुम पाओगे। चाहे तुम जिस अंजान राह में पथ भूलोगे, शायद ही कुछ बातें को ज़रा याद कर लेना मैं ही तुझे कांटें भरी राह में पथ दिखाने आऊंगा।
मैं हूं जग का सूरज,तेरे जीवन का अंधेरा मिटाने आऊंगा । तेरा झूठा मन पर सच का चादर ओढ़ाने तेरे घर आऊंगा,
जब तेरा मन विचलित होगा, तब-तब तुझे जगाऊंगा।जिस पथ में बढ़ोगे,पहले मेरे ही पदचिन्हों को तुम पाओगे |


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