गीत/कवि गौरव झा//सफ़र में चलते हैं तो क्या हुआ!!
सफ़र में चलते हैं तो क्या हुआ!!
मुझे घर को वापस आना है!!
हार-जीत को साथ लेकर
हमें मंज़िल तक जाना है!!
नाकामियों को वो घबराते
जो कायर होते हैं,
शूरवीर हार को दिल से,
स्वीकारा करते हैं।।
सफ़र में चलते हैं तो क्या हुआ!!
मुझे घर को वापस आना है!!
हार-जीत को साथ लेकर
हमें मंज़िल तक जाना है!!

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