गीत//कवि गौरव//कभी तू याद आती है।
कभी तू याद आती है,
कभी आंखों से दूर जाती है,
गहरे जख्म कैसे बयां करूं अपनी,
कभी तू पास आती है,
कभी आँखों से दूर जाती है।
जमाने देखकर कुछ ख़ामोश बैठा हूँ,
दिल के आशियाने में,तुझे अपने पास रखा हूँ,
तेरे मासूमियत चेहरे ने, पागल बना डाला,
तुझे गंगा समझता हूं, तुझे यमुना समझता हूं।
कभी तू याद आती है,
कभी आंखों से दूर जाती है,
मासूम आंखों से क्यूं होती है गुनाह,
कभी ❤️ तड़पती है,कभी आंख नम रहते हैं।

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