शायरी

किसी अंजान पत्थर से ठोकर खाकर भी ज़रा समझदारी रखें,
जनाब!दोस्त  हो या ग़ैर , नज़र  मिलाने से पहले  ज़रा वफ़ादारी रखें,
"गौरव"कई आशिक को इश्क की समंदर में डूबते अकसर देखा है,
दिल से करें प्यार पर ज़रा सोच-समझकर इश्क आप ज़ारी रखें।

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