शायरी on October 11, 2019 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps इस शहर की गलियों में दीप जलाने आया हूँ, हर मकां में दीपक बन अंधेरा मिटाने आया हूँ, ज़िंदगी के भाग-दौड़ भरे इस अंजान पथ पर, आग हूँ, तुम्हारे दिल में मैं आग लगाने आया हूँ!! ✍️ Gaurav Comments
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