कविता

आदिकाल से अब तक दुष्चक्रो के ख़िलाफ़ कलम लड़ी है,
चाहे दिखने में भले छोटी हो,ताकत इसकी तो बहुत बड़ी है,
सर्वनाश का काले बादल जब-जब इस धरा पर ऐसे छाएगा,
हे कलम!तू तब-तब अपने इस राष्ट्र के खातिर आग उगलेगा।
✍️कवि गौरव झा

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