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Showing posts from February, 2019

कविता:-- इश्क से डरता हूँ/कवि,साहित्यकार गौरव झा/

चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, मीत तुम्हारे प्यार को दफन किया, अपने दिल के किसी कोने में, तुम्हें हृदय ने चाहा है हर-पल बहुत पर कलम-दवात पकड़ ली जब से मैंने, मुझे कुछ क्षण छोड़ दो तुम अकेले में, कवि हूँ!शायर हूँ! कविता मेरी जान है, चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, इस दिल में मैंने दफ़न किया कई रिश्ते, सबकी वेदना को समझता हूँ,ख़ामोश होकर, शायद कवि होने का यही मेरी पहचान है, मुझे लोगों की पीड़ा लिखने छोड़ दो अकेले में। हर किसी की तकलीफ़ में चट्टान जैसा खड़ा हूँ, ना कोई मेरी ख्वाइश,ना कुछ भी मेरी मंज़िल, ख़ुद हारकर दूसरे को जीताने लगा हूँ,मीत कैसे करूँ तुझसे? अपनी शौहरत का बखान, सच राह पर हूँ,इसलिए लोगों की नज़र में बड़ा हूँ। कम्बख़्त!डरता हूँ अपनी आंखों से, भूल से नज़र मिलाकर भूलने की कोशिश करता हूँ, हर-क्षण, हर-पल नज़र चुराता हूँ इश्क से, भरोसा नहीं मुझे आजकल के  प्यार में, शायद दिल किसी का ना तोड़ना चाहता, मीत,मुझे कुछ क्षण लिखने छोड़ दो अकेले में। चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, मीत तुम्हारे प्यार को दफन किया, अपने दिल के किसी कोने में, तुम्हें हृदय ने चा...

कविता:-- ज़िंदगी // कवि//शायर//पत्रकार गौरव झा

आईना में झांककर तसल्ली से चहरा देखता है कोई, भर-रात सड़क पर ज़िंदगी गुजारता है कोई-कोई ए दोस्त!आराम  की ज़िन्दगी  जीता नहीं दुनिया में कोई, दो-जूम रोटी खाकर  सड़क किनारे सोत...

विनम्रता शब्द में छुपी है "सफलता का राज"(Writer Gaurav Jha)

जीवन में आगे बढ़ने का एक मात्र मूलमंत्र है 'विनम्रता'।इस शब्द के अंदर इतनी शक्ति है कि बड़े से बड़े चट्टान को भी पिघला सकती है।विशाल पहाड़ों को भी अपने क़दमों में झुका सकता है। हमें यह समझने की भूल नहीं करनी चाहिए कि आज के दुनिया में इस चीज़ को अपनाना सरल और सहज कार्य नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं है।या हम यूं समझने का प्रयास करें कि फूल पर मधुमक्खी इसलिए नहीं जाती है कि उसे फूलों से प्यार होता है बल्कि वह फूलों के अंदर कि खूशबू ही उसे खींचकर ले जाती है।चाहे वह फूल पर कितनी भी देर बैठा रहे?फूल उसे कुछ नहीं कहती हैं।इसका भी कारण हैं कि फूल अपने गुणों से उसको परिचित करवाना चाहती है।वो अपने गुणों को दूसरों के समक्ष बखान नहीं करती है,पर गुणवान् कीट-पतंगों भी उसके गुणों को पहचानकर उसके पास आती है। विनम्रता शब्द का मतलब केवल यह नहीं है कि हम केवल एक-दूसरे प्राणियों को समझें।वरन् हम सामाजिक प्राणियों के साथ-साथ पशु-पक्षियों, पेड़-पौधे की आवाज़ को समझने का प्रयास करें।इसे अपनी अंतरात्मा से महसूस करें।अब एक सवाल हम सबके ज़हन में अवश्य हिलोरें ले रही होंगी कि आख़िर समस्त मानव जातियों को...