चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, मीत तुम्हारे प्यार को दफन किया, अपने दिल के किसी कोने में, तुम्हें हृदय ने चाहा है हर-पल बहुत पर कलम-दवात पकड़ ली जब से मैंने, मुझे कुछ क्षण छोड़ दो तुम अकेले में, कवि हूँ!शायर हूँ! कविता मेरी जान है, चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, इस दिल में मैंने दफ़न किया कई रिश्ते, सबकी वेदना को समझता हूँ,ख़ामोश होकर, शायद कवि होने का यही मेरी पहचान है, मुझे लोगों की पीड़ा लिखने छोड़ दो अकेले में। हर किसी की तकलीफ़ में चट्टान जैसा खड़ा हूँ, ना कोई मेरी ख्वाइश,ना कुछ भी मेरी मंज़िल, ख़ुद हारकर दूसरे को जीताने लगा हूँ,मीत कैसे करूँ तुझसे? अपनी शौहरत का बखान, सच राह पर हूँ,इसलिए लोगों की नज़र में बड़ा हूँ। कम्बख़्त!डरता हूँ अपनी आंखों से, भूल से नज़र मिलाकर भूलने की कोशिश करता हूँ, हर-क्षण, हर-पल नज़र चुराता हूँ इश्क से, भरोसा नहीं मुझे आजकल के प्यार में, शायद दिल किसी का ना तोड़ना चाहता, मीत,मुझे कुछ क्षण लिखने छोड़ दो अकेले में। चाहे तुम जाओ सुबह-शाम मेले में, मीत तुम्हारे प्यार को दफन किया, अपने दिल के किसी कोने में, तुम्हें हृदय ने चा...
Gaurav Jha is a signature of Kalam who is a litterateur as well as a skilled speaker, leader, stage operator and journalist. His poems, articles, memoirs, story are being published in many newspapers and magazines all over the country. At a very young age, on the basis of his authorship, quality,ability.he has made his different fame and his identity quite different in the country. यह ब्लॉग यात्रा,इतिहास,शिक्षा और साहित्य से जुड़ी रोचक कहानी और जानकारी साझा करता है.....