WRITER GAURAV JHA सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार-आंदोलन के जनक कहे जाने वाले पद्म विभूषण से अलंकृत महान व्यक्त्वि डॉ. विन्देश्वर पाठक जी थे। उन्होंने सिर्फ़ महात्मा गाँधी जी के सपने को पूरा नहीं किया। बल्कि स्कैवेंजरों के मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए जीवन भर संघर्षरत रहा और अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। अक्सर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी कहा करते थे कि ------------- " शायद मेरा पुनर्जन्म नहीं हो,किंतु यदि ऐसा होता है, तब मेरी इच्छा है कि मेरा जन्म स्कैवेंजरों के परिवार में हो, जिससे मैं सर पर मैला ढ़ोने के अमानवीय, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा घृणित कार्य से उन्हें मुक्ति दिला सकूँ" कहीं न कहीं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. विंदेश्वर पाठक जी महात्मा गाँधी जी के विचारों से प्रभावित थे,और उनके विचारों को सीने में लेकर चला और लाखों स्कैवेंजरों, 'अस्पृश्यों' को मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए महात्मा गाँधी के अधूरे सपने को पूरा किया। दर असल पद्म विभूषण डॉ. विंदेश्वर पाठक जी का जन्म 2 अप्रैल, 1943 को बिहार के वैशाली जिले के रामपुर के बघेल गांव में एक म...
GAURAV JHA गूगल सूचना का सिर्फ़ है माध्यम,किताबों से मिलता है ज्ञान, प्रशस्त करता सही राह मानवों के लिए,किताब है एक वरदान।। हौसला रख मंज़िल की तरफ अगर तुम्हें बढ़ना है, चुनों सही राह,पथिक बनकर जीवन में चलना है।। पहाड़ काटकर माउंटेन मेन मांझी ने बनाया रास्ता, रख जज्बा कुछ कर गुजरने की, तुम्हें करना होगा।। आफ़ताब की तरह चमकने के लिए तुम्हें भी जलना होगा, कदम से कदम मिलाकर अपने कर्तव्य-पथ पर चलना होगा। आंधियां क्या रोकेगी रास्ता, हवा का रूख तू मोड़ सकता है, मंज़िल की राहों में खड़ा हो गर,कोई पहाड़ उसे तोड़ सकता है।। 'ए गौरव' दीपक बनकर जलना होगा, कर्तव्य पथ पर सदा तुम्हें चलना होगा।। रख हौसला,आफ़ताब बनकर जलना होगा, क़दम मिलाकर कर्तव्य-पथ पर चलना होगा।। लाख झंझावतें और विपदाएँ आएं जीवन में हटाना होगा, समंदर क्या रोकेगी रास्ता,नदियों को खुद राह बनाना होगा। @GauravJha