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यात्रा-वृतांत : दिल्ली से माता मनसा देवी मंदिर पंचकुला तक मेरी अद्भुत,यादगार और अविस्मरणीय यात्रा/ Gaurav Jha

   Mansa Devi Temple Panchkula |  यात्रा-वृतांत | दिल्ली से पंचकुला तक मेरी अविस्मरणीय यात्रा | Gaurav Jha __________________________________         Gaurav JHA ( WRITER,COLUMNIST &JOURNALIST )   मेरी इस यात्रा का पहला पड़ाव था - श्री माता मनसा देवी मंदिर, जो स्थित है पंचकुला, हरियाणा में। पंचकुला में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।मनसा देवी मंदिर जो पंचकुला, हरियाणा में स्थित है। मैंने अपनी यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से की। प्रात: सूर्य की लालिमा धरा पर पड़ रही थी। सुबह का तकरीबन 6:00 बज रहा था। हमनें मन में ठान लिया था कि मनसा देवी मंदिर घूमना है,माता का दर्शन करना है। जी हाँ! आखिर ऐसा क्यों न हो? माता का दर्शन सौभाग्य से जो मिलता है। जब भी मनसा देवी माता का कृपा अथवा उनका आदेश होगा।आप भारत के किसी कोने में रहेंगे।आप माता के दरबार में पहुँच ही जाऐंगें।                   हालांकि माता मनसा देवी, भारत के हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले में स्थित...
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जयपुर का गुलाबी रत्न 'हवा महल' : इतिहास,अद्भुत वास्तुकला और पर्यटन का बेजोड़ संगम

        GAURAV   Jha   ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासि...

हिंदी कविता : गांव की यादें // गौरव झा

  GAURAV JHA  ( Journalist, Writer & Columnist ) चाहे चले जाओ,गर सात समुद्र पार  गाँव की याद आती है बहुत मेरे यार।। सिखता आ रहा हूँ,बहुत कुछ गाँवों में रहता हूँ,हर वकत बुजुर्गो के छाँवों में। चाहे चले जाओ,गर सात समुद्र पार गाँव की  याद आती है बहुत मेरे यार।। मिलता था माँ का प्यार सदा गाँवों में जन्नत मिला है  सदा  माँ के पाँवों में।। गाँव में  मिलता बहुत लोगों का  प्यार, शहर आते बहुत कुछ खो दिया मेरे यार। चाहे चले जाओ,गर सात समुद्र पार, गाँव की याद आती है बहुत मेरे यार।। #  <script data-ad-client="ca-pub-6937823604682678" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script>

ग़ज़ल : तुम हो परिंदा / गौरव झा

          GAURAV JHA  ( Journalist, Writer & Columnist ) तुम हो परिंदा, तुम्हें उड़ना नहीं आता, फ़कत इक दिन में मुझे उड़ाना नहीं आता। शरारत से गुजर कर कुछ नहीं होता है हासिल, इसलिए तेरे सवाल मुझे समझाना नहीं आता। नफ़रत की दहकती चिंगारी हैं तेरे अंदर,प्यारे पूछते हो रोज़ सवाल, तुझे सिखना नहीं आता, नहीं है  ज़िंदगी  में कुछ भी तुझे सीखने की चाह, शायद तुम कहते उसे सही से बताना नहीं आता। जाते हो तुम समंदर के पास,कुछ उम्मीद लेकर, नदियों की धार से अपनी बात जताना नहीं आता। बिखरे पड़े,सुनसान पहाड़ों के बगल में कुछ पत्थर, कोहिनूर जैसे बेशकीमती पत्थर तुझे उठाना नहीं आता। ---@ GAURAV JHA

हिंदी कविता : स्यायी / गौरव झा

    GAURAV JHA ( Journalist, writer & Columnist ) अपने एहसासों को स्यायी से गढ़कर पन्नो पर लिख देता हूँ, तुम्हारी हो या फिर  मेरी, अंतर्मन की वेदना को सुना देता हूँ। एहसास जो है मेरे अंदर छुपे, जुबां पर उसे ही लाता हूं, वक्त मिलता जब भी, वहीं काली स्यायी से लिखी  जज़्बात तुम्हें सुनाता हूँ।। अंतर्मन के एहसासों को  शब्द रूपी मालाओं में पिरोता हूँ, कुछ लिखे जज़्बात तुम्हें सुनाता हूँ। अभिलाषा है मेरी भी कुछ ज़िंदगी में कर गुजरने की, चल पड़ती है लेखनी सच्चाई  की ओर, छोटी-सी है क़लम  स्यायी के साथ मिलकर यही बात 'गौरव'दुनिया को  इसकी ताकत बताता  हूँ। स्यायी कागज़ पर गिरती है, यह कुछ नया लिखने को कहती है, लिख लेता हूँ कुछ अंतर्मन के जज़्बात, काली स्याही से, अपने एहसासों को स्यायी से गढ़कर पन्नो पर लिख देता हूँ, तुम्हारी हो या फिर  मेरी, अंतर्मन की वेदना को सुना देता हूँ। चाहे रंग लहू का हो या स्यायी का, काली स्याही को कागज़ की  भट्टी में जलाकर लिखते रहे, लोग वाह-वाह कर-करके  जज़्बात हमारे हमेशा पढ़ते रहे।। ---@ Gaurav...

हिंदी कविता : उड़ान // गौरव झा

     GAURAV JHA (Writer, Journalist & Columnist ) आकाश में जगह नहीं होती है उड़ने की, जैसे पक्षी उड़ान भरती हो खुले नभ में, चुगती है दिन-दिन भर दाना फिर सोचती है वह भी अपने घोंसले में आना। मैं उड़ा हूँ, रूकना मुझे भी नहीं आता, सफ़र पर अकेला चला हूँ, हर विपदाओं से मैं बड़ा हूँ सीखा हूं केवल सतत् चलते जाना, आकाश में जगह  नहीं होती है उड़ने की।। सीखा हूँ मैं भी हुनर केवल  सतत् चलने की। मिले राह में चाहे पहाड़ या हो फिर चट्टान सौ-बार मुझे भी टकराना है, हर सख्त चट्टान का सीना चीरकर राह  ख़ुद नया मुझे बनाना है।। पक्षियों को  उड़ने के लिए पंख चाहिए, मेरा हौंसला ही है जो मेरी उड़ान है।। शौक है मुझे भी खुले आकाश में उड़ने की, मंज़िल की तलाश में उसी दिशा में बढ़ने की, मेरा हौंसला, जज़्बा कम है क्या? यही मेरी उड़ान है। आकाश में जगह नहीं होती है उड़ने की, जैसे पक्षी उड़ान भरती हो खुले नभ में।। ---@Gaurav Jha

हिंदी कविता : ये प्रकृति शाय़द कुछ कहना चाहती है/गौरव झा

ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे ये हवाओ की सरसराहट ये पेड़ो पर फुदकते चिड़ियों की चहचहाहट ये समुन्दर की लहरों का शोर ये बारिश में नाचते सुंदर मोर कुछ कहना चाहती है हमसे ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे ये खुबसूरत चांदनी रात ये तारों की झिलमिलाती बरसात ये खिले हुए सुन्दर रंगबिरंगे फूल ये उड़ते हुए धुल कुछ कहना चाहती है हमसे ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे ये नदियों की कलकल ये मौसम की हलचल ये पर्वत की चोटियाँ ये झींगुर की सीटियाँ कुछ कहना चाहती है हमसे ये प्रकृति शायद कुछ कहना चाहती है हमसे। @ Gaurav Jha