Skip to main content

लेख -- राजनेताओं का अंत अति संकट

जिनके हृदय में जनता के दु:ख-दर्द दूर करने की कसक हो,जिनका अंत:करण दुखियों के दु:ख से द्रवित हो जाता हो,जिन दिलों में ब्राह्मणत्व एवं क्षत्रिय की भावनाएँ हिलोरें ले रही हों,उन्हें जो सच्चे अर्थो में जन-जन के हृदय में वास करना चाहते हों,ऐसे नेता बनने के इच्छुकों से हमारा यह परामर्श है कि भविष्य चरित्रवान नेताओं का है।यदि आप में यह योग्यता न हो तो विकसित करें।भ्रष्ट नेताओं का अंत अब अति निकट है।नेतागिरी का धंधा अब अधिक दिन तक चलने वाला नहीं है,बेहतर है समय रहते चेतने की जरूरत है।अन्यथा महाकाल का चक्र उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगा।अब वाकई लोगों के अन्दर जन चेतना का जागरण हो रहा है।भ्रष्ट राजनेताओं को जनता अब भलीभाँति समझ गई है।यह लोग किस प्रकार भोलीभाली जनता को अब तक लूटते रहे हैं,इनकी पोल खुल चुकी है।अब भ्रष्ट नेताओं की नेतागिरी चलने वाली नहीं हैं।भ्रष्टों को जेल में पहुँचाने का क्रम प्रारंभ हो गया है।जिन्हें नेतागिरी करनी हो उन्हें रास्ता बदल लेना चाहिए।
                 राष्ट्र के मालिक मतदाताओं को भी हमारा परामर्श है कि वे जाति धर्म,रिश्तेदारी,धन,सुविधा,खुशामद,दबाब एवं स्वार्थ के वशीभूत होकर निकृष्ट व्यक्ति को वोट देकर संसद और विधानसभा में न भेजें।एक बार की भूल पाँच साल तक कष्ट देती रहेगी। सच्चे सेवाभावी,चरित्रवान और ईमानदार नेता चुना कर जाएँगे तो सभी का हित होगा। सबके हित में अपना हित भी शामिल है।दुष्ट व्यक्ति को चुनकर भेजने पर पछताने से कोई लाभ नहीं।समय रहते चेता जाए,समय आने पर सर्तक रहा जाए।बिना किसी लाभ,लोभ-लालच के अच्छे योग्य व्यक्तियों को चुना जाए।पार्टीतंत्र से ऊपर उठकर व्यक्ति को महत्व दिया जाए।व्यक्ति अच्छा होगा तो अच्छा काम करेगा चाहे वह किसी पार्टी का हो।यह परामर्श जन-जन तक पहुंचाने का एक आंदोलन राष्ट्र प्रेमी व्यक्तियों को चलाया जाना चाहिए।मतदाताओं को समझाया जाना चाहिए कि अच्छे-बुरे का पहचान करना सीखें।स्वच्छंद रुप से सही चीजों का चयन सदैव बेहतर होता है।और समय पर विवेक से काम लेकर अच्छे नेता चुनें।और सदा स्वतंत्र रुप से जीवन-यापन करें।
                                                 ------ जय हिंद  जय भारत

Comments

Popular posts from this blog

जयपुर का गुलाबी रत्न 'हवा महल' : इतिहास,अद्भुत वास्तुकला और पर्यटन का बेजोड़ संगम

        GAURAV   Jha   ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासि...

यात्रा-वृतांत : दिल्ली से माता मनसा देवी मंदिर पंचकुला तक मेरी अद्भुत,यादगार और अविस्मरणीय यात्रा/ Gaurav Jha

   Mansa Devi Temple Panchkula |  यात्रा-वृतांत | दिल्ली से पंचकुला तक मेरी अविस्मरणीय यात्रा | Gaurav Jha __________________________________         Gaurav JHA ( WRITER,COLUMNIST &JOURNALIST )   मेरी इस यात्रा का पहला पड़ाव था - श्री माता मनसा देवी मंदिर, जो स्थित है पंचकुला, हरियाणा में। पंचकुला में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।मनसा देवी मंदिर जो पंचकुला, हरियाणा में स्थित है। मैंने अपनी यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से की। प्रात: सूर्य की लालिमा धरा पर पड़ रही थी। सुबह का तकरीबन 6:00 बज रहा था। हमनें मन में ठान लिया था कि मनसा देवी मंदिर घूमना है,माता का दर्शन करना है। जी हाँ! आखिर ऐसा क्यों न हो? माता का दर्शन सौभाग्य से जो मिलता है। जब भी मनसा देवी माता का कृपा अथवा उनका आदेश होगा।आप भारत के किसी कोने में रहेंगे।आप माता के दरबार में पहुँच ही जाऐंगें।                   हालांकि माता मनसा देवी, भारत के हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले में स्थित...

सुलभ क्रांति के जनक : पद्म विभूषण डाँ. विंदेश्वर पाठक

  WRITER GAURAV JHA  सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार-आंदोलन के जनक कहे जाने वाले पद्म विभूषण से अलंकृत महान व्यक्त्वि डॉ. विन्देश्वर पाठक जी थे। उन्होंने सिर्फ़ महात्मा गाँधी जी के सपने को पूरा नहीं किया। बल्कि स्कैवेंजरों के मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए जीवन भर संघर्षरत रहा और अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। अक्सर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी कहा करते थे कि ------------- " शायद मेरा पुनर्जन्म नहीं हो,किंतु यदि ऐसा होता है, तब मेरी इच्छा है कि मेरा जन्म स्कैवेंजरों के परिवार में हो, जिससे मैं सर पर मैला ढ़ोने के अमानवीय, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा घृणित कार्य से उन्हें मुक्ति दिला सकूँ" कहीं न कहीं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. विंदेश्वर पाठक जी महात्मा गाँधी जी के विचारों से प्रभावित थे,और उनके विचारों को सीने में लेकर चला और लाखों स्कैवेंजरों, 'अस्पृश्यों' को मानवाधिकार और सम्मान दिलाने के लिए महात्मा गाँधी के अधूरे सपने को पूरा किया। दर असल पद्म विभूषण डॉ. विंदेश्वर पाठक जी का जन्म 2 अप्रैल, 1943 को बिहार के वैशाली जिले के रामपुर के बघेल गांव में एक म...