जयपुर का गुलाबी रत्न 'हवा महल' : इतिहास,अद्भुत वास्तुकला और पर्यटन का बेजोड़ संगम
GAURAV Jha
( Writer,Columnist & Journalist )
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राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासिक स्थल लोगों को बखूबी लुभाते है। जयपुर शहर में एक चुंबकीय गुण दिखाई देता है, जितने भी देश अथवा विदेशों से टूरिस्ट घुमक्कड़ी करने जाते हैं, वे जयपुर शहर के ही हो जाते हैं। है न, जयपुर शहर की खूबसूरती और वहाँ की मिट्टी की खुशबू की खासियत।
जयपुर की खूबसूरत कलाकृति,संस्कृति, वेश-भूषा, त्योहार टूरिस्टों को अपनी ओर आकर्षित करती है, हर शहर की भी अपनी एक दास्तां अथवा आप बीती होती है, जो बयाँ करती है, आप इस शहर में आईए। हम आपका स्वागत करने को तैयार है।
जयपुर का किला हो अथवा झाँसी का किला हर ऐतिहासिक स्थल की अपनी कहानी होती है। न जानें इतिहास के कितने पन्नों को समेटकर- रखती है, यह किला । आईए उसी क्रम में मेरी नज़र में जयपुर का असाधारण वास्तुकला में से एक है --- हवा महल' यहाँ टूरिस्टों का तांता लगा रहता है। यूनेस्को ने इसे 'वर्ल्ड हेरिटेज' की लिस्ट में शामिल कर रखा है। 'हवा महल' को देखने टूरिस्ट बहुत दूर-दूर से आते हैं। लेकिन क्या आपके ज़हन में ये ख्याल आया है इस महल को बनाने के पीछे की वजह क्या रही होगी? आखिर क्या आप कभी सोचते हैं कि क्यों इसका निर्माण किया गया?
जयपुर का हवा महल दशकों से दुनिया भर के कई यात्रियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। खूबसूरत और जटिल नक्काशी, नाजुक वास्तुकला के साथ, यह आज भी बीते समय की सबसे खूबसूरत कृतियों में से एक है। 'हवा महल' अपना अनोखा वास्तुकला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हाथों से, पत्थर-पत्थर तराशकर बनाई गई यह इमारत एक ऐसा आकर्षण बिखेरती है, जिसकी तुलना आज की दुनिया में देखी जाने वाली किसी भी अन्य संरचना से नहीं की जा सकती है। इसकी भव्य वास्तुकला, जो बीते युग की झलक दिखाती है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं और कोई ऐसी जगह घुमना जाना चाहते हैं। जहां आज हम आपको ऐसे वास्तुकला का वो नायाब उदाहरण पेश करने जा रहे हैं जो समूचे विश्व में पर्यटन का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ एक पहेली भी रहा है। जी हाँ, हम आपसे बतियाने की कोशिश कर रहे रहे हैं।जरा आप हमारी भावनाओं के अंदर हिलोरे ले रहें शब्दों से जुड़ जाइए।हम आपसे गुफ्तगू कर रहें हैं जयपुर में स्थित हवा महल की। अगर आपको घुमक्कड़ी करना पसंद है तो आप जयपुर के हवा महल को देखने जरूर जाएँ। जयपुर शहर अपने अंदर ही कई ऐतिहासिक पन्नों को समेटे हुई है।
हालांकि जयपुर का हवा महल गुलाबी खिड़कियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।इस महल की खूबसूरती पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह महल दूर से देखने पर भगवान श्री कृष्ण के मुकुट की तरह नज़र आता है। अगर आप एक बार इस हवा महल की संरचना, वास्तुकला,उत्कृष्ट नक्काशी, अद्भुत कलाकृति और डिजाईन को देखेगें तो फिर देखते रह जाएँगे। दूर असल जयपुर का हवा महल पाँच मंजिला है और 87 डिग्री के कोण पर झुका हुआ है। हवा महल में तक़रीबन 953 खिड़कियाँ हैं। यहीं खिड़कियां पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। हवा महल की ये खिड़कियां शाही महिलाओं के लिए आमतौर पर बनवाई गई थी। इसका कारण यह था कि जब नीचे की गली में रोजाना के नाटक, बाज़ार और कला - संस्कृति,नृत्य आदि देख पाएं। हालांकि पुराने ज़माने में शाही महिलाएं इन खिड़कियों से शहर के सुंदर और खूबसूरत नज़ारों को देखती थी। इस हवा महल को इस्लामी शैली पर पर बनाया गया है। वहीं बांसुरी वाले खंभे राजपूत शैली से बनाए गए हैं। बता दें कि हवा महल के अंदर तीन मंदिर हैं। जिनका नाम गोवर्धन कृष्ण मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर है। यह हवा महल लाल और गुलाबी रंग के बलुआ पत्थरों से बना है।
सन् 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा निर्मित यह महल पर्यटकों द्वारा जयपुर की सबसे पसंदीदा जगहों में काफ़ी शुमार है।इस ईमारत को खासतौर पर रानियों के लिए बनवाया गया था। जब भी जयपुर में नृत्य-संगीत,कला, त्योहार अथवा कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाता था। वहाँ की रानियाँ बनी खिड़कियों से झांककर उनका आनंद लिया करती थी। कार्यक्रमों और नृत्यों का लुत्फ उठाया करती थी। इसलिए इन खिड़कियों को 'झरोखे' भी कहा जाता है। सबसे दिलचस्प कहानी यह है कि महाराजा सवाई प्रताप सिंह भगवान श्री कृष्ण के बहुत ही बड़े भक्त थे, इसलिए आप देखेंगे की बाहर से हवा महल की आकृति श्री कृष्णा के मुकुट के समान है।
इस महल की वास्तु निर्माण लाल चाँद उत्ताद ने की थी। इसका निर्माण 1799 में महाराज सवाई प्रताप सिंह के शासनकाल में उनके द्वारा करवाया गया।हालांकि राजस्थान अपनी प्राचीन संस्कृति, खूबसूरत पहनावा और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित 'हवा महल' अपने नाम के अनुसार शीतल हवा का एहसास कराता है, इसकी अद्भुत नक्काशी और बनावट की कलाकारी अद्भुत है। जी हाँ आखिर क्यों न हो, अद्भुत कलाकारी राजस्थान की राजधानी जयपुर (Pink city) की बात ही कुछ और है।
राजस्थान की तपती गर्मी में भी हवा महल में गर्मी का एहसास न हो, इसलिए महल में 953 छोटी-छोटी खिड़कियां हैं। इस पाँच मंजिला ईमारत में ऊपर जाने की सीढ़ियां नहीं है। जयपुर के मुख्य टूरिस्ट प्लेस में से एक हवा महल घुमने के लिए सबसे अच्छी जगह है? इस हवा महल में राजपूत स्थापत्य शैली को दर्शाती है। एक दिलचस्प बात यह है कि इस महल में 953 छोटे-छोटे झरोखे बनाए गए हैं और बारीकी से सुंदर नक्काशी की गई हैं।दर असल, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना हवा महल को डिज़ाइन किया गया, यह अपनी तरह का अनूठा महल है। इसमें पांच मंज़िलें हैं और यह 50 फीट की ऊँचाई तक जाता है। महल के सामने के हिस्से में मौजूद 953 खिड़कियाँ इसे छत्ते जैसा दिखाई देती है। इन खिड़कियों पर असाधारण जालीदार काम की बदौलत, हवा इसके अंदर आने पर महल में ठंडक का एहसास होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस महल का नाम इसकी 5वीं मंजिल के नाम पर रखा गया था, जिसे हवा मंदिर के नाम से जाना जाता था। जयपुर का हवा महल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है। इसकी बनावट राजपूत और मुगल वास्तुकला का सुंदर और अद्भूत संगम है।
आज हवा महल जयपुर का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहाँ इसकी खूबसूरती देखने आते हैं। सुबह की हल्की धूप जब इसके झरोखों पर पड़ती है तो पूरा महल सुनहरे रंग मे चमक उठता है,मानों इतिहास खुद मुस्कुरा रहा हो। हवा महल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की शान, संस्कृति और शिल्पकला की जीवंत कहानी है। जयपुर का हवा महल केवल ईंट और पत्थरों की ईमारत नहीं.... यह उस दौर की परंपराओं, विश्वासों और राॅयल जीवन शैली की जीवित कहानी है। जब भी आप जयपुर जाएं तो इन झरोखों को ध्यान से देखियेगा। कहीं ऐसा न हो कि इतिहास आपको भी कोई अनकहा राज़ सुना दे ....
अगर आप ऐसी ही ऐतिहासिक कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं तो हमसे जुड़े रहिए।फिर मिलेंगे एक और ऐतिहासिक नई कहानी के साथ। तब तक के लिए नमस्कार।🙏
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