साहित्य जन्म से ही हमारे साथ है।बचपन में भी मां की लोरी,दादी-नानी की कहानियाॅ मन को भाती हैं।सार्थक या निरर्थक शब्दों के जोड़ तोड़ से बोलने का अभ्यास हो जाता है।शब्द आकर्षित करते हैं।मनोरंजन के साथ शिक्षा देना ही बाल लोक साहित्य का उद्देश्य रहा होगा।आज भी बाल साहित्य का जिक्र होते ही मन में पंचतंत्र और हितोपदेश की कथाएॅ आती हैं।पशु पक्षियों के माध्यम से बच्चों को उचित अनुचित सही गलत की सीख दी गयी है।पर चूॅकि वह सब कहानियाॅ एक दूसरे में गुंथी हुई हैं,उन्हें पढ पाना थोड़ा मुश्किल था।
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि बच्चे का साहित्य से क्या लेना देना?सही बात तो यह है कि साहित्य की पहली सीढ़ी बाल जीवन ही है।लोरियाॅ क्या हैं?साहित्य में झांकने वाला सबसे पहला झरोखा ही तो हैं।स्कूल जाने से पहले ही बच्चे कहानी किस्सा सुनने और बोलने में माहिर होते हैं।काश!कितना अच्छा होता कि बच्चे की पहली पुस्तक उसके घर और उसके बाद जीवन से जुड़ी होती।आयु के आधार पर उसकी पाठ्य पुस्तकें बनी होतीं।आजकल बाल-साहित्य की ओर से छोटे-छोटे बच्चों का रुझान कम होता जा रहा है।वास्तव में समाज के भीतर यह बेहद गंभीर मुद्दा है। डिजिटल युग में बच्चों का ध्यान साहित्य की ओर कैसे आकर्षित किया जाये,इसके लिए हरेक शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को साहित्य की महत्वता को समझाने की जरूरत है।बच्चों को महान् विभूतियों के विषय में जानकारी देना हमारा कर्तव्य है।डिजिटल ज्ञान के साथ- साथ अच्छे साहित्य का अध्ययन बच्चों का विकास ,दिशा,और दशा सभी को बदलने में मददगार होगा।
--- आपका कलमकार गौरव झा
GAURAV Jha ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासि...
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