प्रेम का अर्थ तो हमेशा समर्पण है।वो भी किसी के साथ निस्वार्थ भाव के साथ किया गया समर्पण ही प्रेम की परिभाषा है।चाहे वो प्रेम भगवान के प्रति हो,या रामायण में राम,लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न का भ्रातृ प्रेम हो,या मातृभूमि के प्रति हमारे सेना का प्रेम हो।सच्ची लगन,सच्ची सेवा ही प्रेम की नींव हैं।लेकिन आज के समाज के कुछेक जन ने प्रेम की परिभाषा को धूमिल कर दिया है।प्रेम तो सदा लेता नहीं है।यह हमेशा कुछ न कुछ देता है।प्रेम शब्द ही अथाह सागर है।जितना डूबोगे डूबते चले जाओगे।अब ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आपके हाथ मे हीरा है तो हीरा की चमक पहचानने की जरूरत है।और हां जरूरत है,हीरा को कैसे बचा कर रखें।ठीक उसी तरह अपनी सभ्यता,संस्कृति,और अपनी विरासत को कैसे बचाकर रखें।वो आपके हाथों मे है।चाहे तो हीरा की तरह संभालकर रखो।या फिर कहीं खो दो।
--- आपका छोटा कलमकार गौरव झा
GAURAV Jha ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासि...
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