प्रेम है सागर से गहरा,
भाषा इसकी बहुत सरल
जाने जो प्रेम की भाषा
नफरतों में भी प्यार खोजता,
सदा इतिहास गवाह रहा,
ठोकरें खाकर देता वहीं
समाज को एक नयी परिभाषा।
जीवन हैं संघर्ष के धागे जैसा,
हल्के में न समझो ऐसा-वैसा
जो पर्वत शिखर पर चढ़ता है,
हौसला आगे बढ़ने की रखता है,
लाख कांटें चुभे, फ़िर भी
आगे हमेशा राह में वो बढ़ता है,
जो पथ में राही बनकर चलता है,
लाख विपदाएं, झंझावतों से,
जो कभी नहीं घबराता है,
वहीं हमेशा जीवन में बढ़ता है।
हो तुम सृजन के बीज,
अंकुरित होकर पौधे बनते हो,
हरियाली,फल देकर तुम,
मानव को हमेशा देते हो,
लेने की नहीं तुम्हारी चाह,
केवल देते जाते हो...........
हे सुक्ष्मदर्शी!तुम हो राष्ट्र निर्माता,
अपनी कल्पनाओं, चिंतन से
समाज को देते हो नया रुप
भू पर सृजन के बीज बोकर,
राष्ट्र का इतिहास बताते हो,
कभी दिनकर,अटल, महादेवी
के गीत, कविता सुनाते हो।
टूटे,हताश,भटकते मन को,
तुम पथ बनकर राह दिखाते हो।।
GAURAV Jha ( Writer , Columnist & Journalist ) ---------‐--------------------------‐----------------------------------------- राजस्थान अपनी संस्कृति, वेशभूषा, पहनावा, त्योहारों और संगीत के अलावा अनोखे खूबसूरत, प्रसिद्ध किलों के लिए काफ़ी मशहूर है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आप घूम सकते हैं। जी हाँ! आप राजस्थान के जयपुर शहर में घूमने का प्लान बनाएँ। क्योंकि घुमना अथवा घुमक्कड़ी करना भी एक कला है, घुमक्कड़ी के दौरान जहाँ भी घुमने जाइए। आप उस राज्य की संस्कृति, पहनावे, त्योहारों और खान-पान का लुत्फ़ उठाईए ।यकीनन उस राज्य के लोगों के बारे में जानिए, समझिए, थोड़ी बहुत गुफ्तगू कीजिए। किसी भी देश अथवा राज्य की असली पहचान वहाँ की संस्कृति, कला, शिक्षा-प्रणाली, त्योहारों,नृत्य-संगीत और वहाँ के इतिहास से होती है। राजस्थान के कई शहर ऐसे हैं, जहाँ जाकर इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने का मन करने लगता है। ऐसी ही एक खूबसूरत शहर है 'जयपुर, जो राजस्थान की राजधानी भी है। यहाँ राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक किले और वहाँ की वास्तुकला, ऐतिहासि...
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