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दोहा:-- गौरव

देश का मान  हमें बढ़ाना है,
संविधान को हमें बचाना है,
मुल्क में हो सदा अमन-चैन,
नफ़रत को ज़रा  मिटाना है।
रक्षा करेंगे देश हित की सदा,
गद्दारों से सदा इसे बचाना है।
मन,वचन,कर्म से करेंगे नेक काम,
राष्ट्र का बढ़ता रहे जग में सदा मान,
जनहित की बात सदा ही करना है,
मिल-जुलकर आतंक को मिटाना है।

हिंदू है अपने देश की  सदा से एक पहचान,

रग-रग में लहू गर्म है,यह अपना है हिंदुस्तान।

रामराज्य में फैली है चहुंओर आजकल लुट,

मुँह में पान रखें दिन-भर बोले यहाँ सब झूठ।

भाई-भाई से लड़ रहे अब यह है अपना मुल्क,

फैल रहा है हर जगह बुराई,जीत रहें हैं अब झूठ।

दीपक का  जलना है गौरव सदा,मिलता इसे नाम 

अपने तमश को छुपाकर बनाता यह सभी के काम।

जग में जो बन बैठा दीया,उसका बढ़े सदा मान,

यह जग क्या?देवता  करते सिर्फ़ उसी का सम्मान।।

तन-मन में बसा है सिर्फ़ एक ही नाम,

बिगड़े बनाते प्रभु सबके एक दाता राम।

कितने जीवन में आए हैं मुसाफ़िर ये लोग,

जैसी करनी-वैसी भरनी जीवन में तू आज भोग।

डाल-डाल पे बैठा है आज तोता,बोलता यह मीठी बोल,

महज़ कुछ हैं जो  एक-एक करके खोलता सबका पोल।।

मज़हब-मजहब में  करो न तुम कभी भी तकरार,

मिल-जुलकर  रहो,बचाओ अपने राष्ट्र की संस्कार।।

बड़ा पेड़ देता नहीं पथिक को कभी भी है छांव,

छोटा बनके रहने से डगमगाते नहीं गौरव के पाँव।।

मनुष्य जीवन से बनता है हर दौर में ही साहित्य,

सबके दिलों को रौशन करें, कहलाता वहीं आदित्य।।

फरेब जाल,मोह-माया में यह फँसा है पूरा संसार,

मीठी वाणी बोलकर पीछे समझते उसे बेकार।।

राष्ट्र को मिलता सदा अपने हिंदुत्व से ही पहचान,

गर्व करो सदा तब नाम पड़ा है अपना यह हिंदुस्तान।

नापाक हरकत कर रहा है ये सदा से पाकिस्तान,

समूचा आतंकवाद को मिटा देगा मेरा ये हिंदुस्तान।।






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