यात्रा-वृतांत : दिल्ली से माता मनसा देवी मंदिर पंचकुला तक मेरी अद्भुत,यादगार और अविस्मरणीय यात्रा/ Gaurav Jha
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( WRITER,COLUMNIST &JOURNALIST )
मेरी इस यात्रा का पहला पड़ाव था - श्री माता मनसा देवी मंदिर, जो स्थित है पंचकुला, हरियाणा में। पंचकुला में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।मनसा देवी मंदिर जो पंचकुला, हरियाणा में स्थित है। मैंने अपनी यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से की। प्रात: सूर्य की लालिमा धरा पर पड़ रही थी। सुबह का तकरीबन 6:00 बज रहा था। हमनें मन में ठान लिया था कि मनसा देवी मंदिर घूमना है,माता का दर्शन करना है। जी हाँ! आखिर ऐसा क्यों न हो? माता का दर्शन सौभाग्य से जो मिलता है। जब भी मनसा देवी माता का कृपा अथवा उनका आदेश होगा।आप भारत के किसी कोने में रहेंगे।आप माता के दरबार में पहुँच ही जाऐंगें।
हालांकि माता मनसा देवी, भारत के हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर है जो शक्ति के एक रूप, देवी मनसा देवी को समर्पित है। यह मंदिर परिसर शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में तक़रीबन 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। हमारी मनसा देवी मंदिर की यात्रा शुरू हुई। हम तकरीबन 6:00 बजे नई दिल्ली स्थित आवास से कश्मीरी गेट की ओर रवाना हुए। हालांकि आप देश अथवा राज्य के किसी भी शहर में रहें। यात्रा करना काफी सुलभ और सहज होता है। आपको अपने घर से सिर्फ़ निकलने की देर है।जब आप अपने घर से निकलकर जैसे ही सड़क पर कदम रखते हैं। ख़ासतौर पर शहर में आपको हरेक प्रकार की गाड़ियाँ, ऑटों, बस,ट्रेन,मेट्रों मिल ही जाती हैं,जो शहर के हर इलाके को आपस में परस्पर जोड़ती है।शहरों में ख़ासतौर पर मेट्रो से यात्रा करना भी लोगों के लिए सहज और आसान है। यात्रियों के लिए मेट्रों का सफर भी आरामदायक होता है, साथ ही बसों में धक्के खाने से अच्छा मेट्रो से यात्रा करना पसंद करते हैं।क्योंकि उनसे उनका समय की भी बचत होती है और शहर के सड़क मार्ग पर लम्बी-लम्बी गाड़ियों की कतार अथवा ट्रैफिक का भी सामना भी नहीं करना पड़ता है।
सुबह का वक्त था, लगभग 9:00 बजे हम कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर उतरे। हालांकि उससे पहले मेरा एक साथी का अचानक कॉल आया। मेरी मोबाईल की घंटी अचानक बजने लगी। मैंने पांच-छह सेकेंट के दरमियान फोन उठाया। जैसे ही फोन की घंटी बजी। और मैंने उठाकर कहा - "आप कहाँ हैं? आप अभी कहाँ तक पहुँचे हैं? उसने कहा "हम जनकपुरी पश्चिम पहुँचे हैं फिर उसने विनम्र लहजे में कहा - आप कहाँ है? कहाँ पहुँचे हैं? मैंने कहा - " राजीव चौक"। हालांकि उसको मैंने सुबह में तकरीबन 6.00 बजे फोन किया लेकिन उसकी मोबाईल की पूरी घंटी बजी।उसने किसी कारणवश फोन नहीं उठाया। हालांकि थोड़ी देर बाद उसका कॉल मेरे मोबाईल में आया। मैंने उससे कहा चलना नहीं है क्या? उसने 'हाँ ' में मुझे जवाब दिया। उसने कहा- हाँ, चलना है लेकिन बस से! मैंने कहा ठीक है। मैंने उसे कहा- जब आप घर से निकल जाईएगा। मुझे फोन कर दीजिएगा।क्योंकि उसके घर से मेरी घर की काफी दूर थी।
इसलिए हम दोनों ने आपस में परस्पर विचार-विमर्श करके कश्मीरी गेट अंतराज्यीय बस अड्डा पर एक साथ मिलने का प्लान बनाया लेकिन वो मुझे किसी व्यस्तता के कारण फोन करना भूल गया। मुझे आवास पर बेठे-बैठे काफी देर हो रही थी। मेरी नज़र बार-बार मेरी कलाई पर बंधी घड़ी की सुईयों पर जा रही थी। मुझे थोड़ा बहुत गुस्सा भी आ रहा था। लेकिन कुछ मिनटों के बाद मैंने खुद उसे फ़ोन किया। उसने फ़ोन उठाया। और अचानक उसने फोन पर कहा- मैं जनकपुरी पश्चिम में हूँ। दर, असल उस वक्त तक मैं अपने दिल्ली स्थित आवास पर उसका फ़ोन आने का इंतज़ार कर रहा था।दर असल फिर क्या था? मैंने भी कश्मीरी गेट की ओर निकला पड़ा। कश्मीरी गेट अंतराज्यीय बस अड्डा है। यहाँ से भारत के हर राज्यों के लिए बस उपलब्ध हैं। सरकारी बस से लेकर प्राइवेट बस की सुविधाएँ यहाँ से मिलती हैं। हालांकि घर से अकेले निकला था लेकिन कश्मीरी गेट बस अड्डा पर एक ओर साथी मिल गया। हम दोनों ऑफिस के कार्य से सबसे पहले यात्रा अंबाला कैंट थी। उसके बाद अंबाला शहर और अंत में पंचकुला (हरियाणा) जाना था। यह जगह हम दोनों के लिए बिल्कुल नई जगह थी। लेकिन मन में काफ़ी उत्सुकता भी थी। नया शहर, नए लोग से मिलने का अवसर मिलेगा। यह अवसर हम खोने देना नहीं चाहते है। मन में विचार किया कि भले शहर नया हो लेकिन वहाँ के लोगों में मिलने का मौका मिलेगा। उनके रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा एवं संस्कृति को बड़ी बारीकी से जानने, उन्हें समझने का अवसर मिलेगा। जब भी आप किसी शहर अथवा राज्य में घुमक्कड़ी करने का मन करें तो वहां के स्थानीय लोगों से बतियाएँ। उनसे थोड़ी बहुत गुफ़्तगू कीजिए।उस स्थान के बारे में जानिए। क्योंकि ये अवसर हर किसी को नहीं मिलता। किसी भी व्यक्ति अथवा उस स्थान जहाँ आप गए हैं, उस स्थानों, दीवारों, किला से आप संवाद कीजिए।वह भी शायद आपसे कुछ कहना चाहती हो। किले की दीवारों, प्राचीन स्थल आदि को महसूस करने का प्रयास कीजिए। वह भी शायद आपसे कुछ बतियाना चाहती हो।
अमूमन वार्तालाप करना भी एक कला है लेकिन मायने ये रखता है कि आप कितने कम समय में महत्त्वपूर्ण संवाद किसी व्यक्ति विशेष से कर पाते हैं। संवाद करते वकत केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप ही बोले, बल्कि आपके सामने खड़ा अमुख जो व्यक्ति हैं उसे बोलने का मौका दें। जिससे वह भी अपनी भावना को शब्दों में पिरोकर सही तरीके से व्यक्त कर सकें। क्योंकि संवाद करना जितना महत्त्वपूर्ण पहलू है उससे कहीं ज्यादा "सुनना भी महत्त्वपूर्ण है।"
सुबह का वक्त था। सूरज की किरणें पृथ्वी पर अपनी लालिमा बिखेर रही थी। कश्मीरी गेट बस अड्डा पर हम और एक ओर साथी मिले। सुबह के समय जल्दबाजी के कारण घर से नाश्ता करके नहीं चला था। दोनों ने उसी बस अड्डा के नज़दीक के ढ़ाबा में नाश्ता किया। दर असल दिल्ली में जब भी कहीं घूमने जाता हूँ।मुझे यहाँ के छोले-भठूरे और परांठे काफी पसंद है। मैंने ढ़ाबा में भी छोले-भठूरे का ऑर्डर दिया। मेरा एक मित्र उसने अपने लिए आलू परांठें का आर्डर दिया।ढ़ाबा का नाम मुझे स्मरण में नहीं है लेकिन नि:संदेह वह पंजाबी ढ़ाबा था। हम और हमारे एक मित्र पंजाबी दाबा में बैठकर आपस में परस्पर संवाद कर रहे थे। वार्तालाप इस विषय पर कर रहे थे। आखिर हम दोनों को लंबी यात्रा करना था। लगभग दिल्ली से पहले अंबाला, फिर अंबाला सिटी और अंत में पंचकूला की यात्रा करना था जो हरियाणा में स्थित है। हालांकि पंचकुला चंडीगढ़ से काफ़ी नज़दीक है।
हम दोनों के संवाद के बीच में आर्डर किया हुआ सुबह का नाश्ता मेरे टेबल पर आया। हम दोनों ने नाश्ता किया। और उसी क्रम में संवाद के ज़रिए पूरी यात्रा की प्लानिंग की। सुबह का नाश्ता करने के बाद हम दोनों मित्र कश्मीरी गेट बस अड्डा की ओर जाने लगे। कुछ दूर जाने के बाद मेरे पीछे से आवाज आई। किसी व्यक्ति की आवाज़ थी। मैंने पीछे मुड़कर देखा। एक व्यक्ति मेरी तरफ आ रहा था। आने के बाद उसने कहा -- 'आप दोनों को कहाँ जाना है?' कुछ मिनट तक हमने उसे बड़ी बारीकी से उसकी ओर देखता रहा। फिर मेरे बगल में खड़ा एक साथी ने कहा - 'मुझे पंचकुला जाना है'।बस कहाँ से मिलेंगी ? उसने हम दोनों को अपने साथ कुछ दूर पर बने बस के काउंटर पर ले गया।और वातानुकूलित एसी बस की टिकट बनाने लगा। लेकिन बस का किराया ज्यादा होने के कारण मैंने स्पष्टतौर पर मना कर दिया। फिर हम दोनों बड़े चहलकदमी के साथ कश्मीरी गेट बस अड्डा की ओर चल पड़े।
दर असल वहाँ पहुँचने के बाद हमारे मित्र ने दो टिकट ले लिया। हालांकि आपको बता दें कि कश्मीरी गेट (आई. एस. बी.टी) अन्तर्राज्यीय बस अड्डा है,जो महाराणा प्रताप के नाम पर है।इसे मुख्यतौर पर महाराणा प्रताप अन्तर्राज्यीय बस अड्डा कहा जाता है। दूसरी तरफ आई.एस.बी.टी.(ISBT) कश्मीरी गेट जिसे 'कश्मीरी गेट बस अड्डा' या 'बस अड्डा' इत्यादि नामों में काफ़ी शुमार है। दिल्ली में स्थित भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े अन्तर्राज्यीय बस अड्डों में से एक है। कश्मीरी गेट अन्तर्राज्यीय बस अड्डा तकरीबन 13 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है तथा यहाँ से एक दिन में करीब 1800 से अधिक बसें चलती है। आपको बता रहे थे कि मेरे मित्र ने कश्मीरी गेट बस अड्डा पर बने काउंटर से दो टिकट पंचकुला जाने का लिया। लेकिन बस का खुलने का समय साढ़े दस बजे था। हमारे पास करीब एक- टेढ़ घंटा इंतज़ार करने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं था। हम दोनों काउंटर के आगे जाने के बाद एस्कलेटर यानि स्वचालित सीढ़ियों से नीचे बेसमेंट में पहुँच गए। और अपनी बस आने का इंतज़ार करने लगे।
दरअसल जब भी आपकों कभी कश्मीरी गेट बस अड्डा से कहीं यात्रा करने का मन करें। आप यहाँ जरूर आएँ। यहाँ आपको सात अन्य राज्य हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के बीच बस सेवा मिल जायेगी। यहाँ बस नंबर के हिसाब से कौन बस कब आएगी। इसका नंबर 42, 43, 44, 45, 46, 47 और 48 इत्यादि है। इस प्रकार बस रूकने के स्थान यहां बनाई गई हैं।
अमूमन हम दोनों बस का इंतज़ार करने लगे। उसी बीच में मेरा मित्र ने वहाँ बने स्टाँल से पानी की बोतल, बिस्किट, कुछ चटपटी नमकीन और कुछ फल खरीद कर अपने पास रख लिया। जिससे बस की यात्रा के दौरान खान-पान से संबंधित किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।तकरीबन डेढ़ घंटे की इंतज़ार के बाद हमारी बस लगी । हम दोनों मित्र ने अपनी सीट नंबर के अनुसार बस में बैठ गए। बस की सीट काफ़ी आराम दायक थी। जी हाँ! फिर क्या था? यात्री धीर-धीरे बस में बैठने लगे। कुछ देर के बाद बस पंचकूला जाने के लिए खुली। शहर आखिर शहर होता है। यहाँ की सड़कें इतनी अच्छी है कि बस की यात्रा भी आराम दायक लग रही थी। बस का बाहर का नजारा काफ़ी खूबसूरत था। करीब चार से पाँच घंटे की यात्रा के बाद हम दोनों पंचकुला पहुँचे। चार-पाँच घंटे की यात्रा के दौरान बस दो जगहों पर कुछ देर के लिए रुकी। जहां आप खाना खा सके। मुझे ज़हन में याद है शायद वह "ग्रेट खल्ली ढ़ाबा " पे रुकी।उस स्थान का नज़ारा बेहद खूबसूरत था। चारों तरफ दुकानें, कैफे और बीच में " The Great Khali Dhaba"। आपको बता रहे थे कि हम दोनों पंचकुला बस से उतरने के बाद लगभग एक-दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।उसके बाद एक आँटो किया और श्री माता मनसा देवी मंदिर की ओर रवाना हुए। करीब बीस मिनट की यात्रा के बाद पंचकुला हरियाणा में स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर पहुँच गए। हालाँकि वहाँ मंदिर परिसर का नज़ारा काफ़ी शानदार और अद्भूत था। चारों तरफ दुकानें सजी हुई थी। हम दोनों यात्रा के दौरान काफ़ी थक जाने के कारण आराम करने लगे।फिर माता मनसा देवी मंदिर के परिसर की ओर बढ़ने लगे।
दर असल मंदिर की बनावट,उत्कृष्ट और अद्भूत कलाकृति देख अचंभित थे।मेरे मन में ख्याल आया।जैसा इस मंदिर की ख्याति और महिमा के बारे में सुना था।उससे कहीं ज़्यादा इस पवित्र स्थान पर आने के बाद पाया।सचमुच मंदिर परिसर का नज़रा काफ़ी खूबसूरत था। मन में काफ़ी प्रश्न उठ रहे थे कि क्या सच में एक ऐसा मंदिर है जहाँ मन की हर इच्छा पूरी हो जाती है? जहां लोग अपनी मनोकामना के लिए धागा बांधते हैं.......और इच्छा पूरी होने पर वापस आकर उसे खोलते हैं।लेकिन सवाल यह है कि इस मंदिर की शुरूआत कैसे हुई?क्या सच में यहाँ माता मनसा देवी ने किसी राजा को सपने में दर्शन दिए थे।आज हम आपको लेकर चलेंगे हरियाणा के पंचकुला में स्थित माता मनसा देवी मंदिर की रहस्यमयी और आस्था से भरी दिलचस्प कहानी की ओर।
हालाँकि यह कहानी है भारत के सबसे चमत्कारी मंदिरों में से एक श्री माता मनसा देवी मंदिर की। हरियाणा के पंचकुला में स्थित यह मंदिर सिर्फ़ एक धार्मिक स्थल नहीं...बल्कि करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है।सालों पहले महाराजा गोपाल सिंह को सपने में माता का आदेश मिला कि इसी स्थान पर उनका मंदिर बनाया जाए।राजा ने मंदिर बनवाया और तभी से यहां होने लगे ऐसे चमत्कार.....जिनकी चर्चा दूर-दूर तक होने लगी। माता मनसा देवी मंदिर एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह भारत के हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले में स्थित है,जो मनसा देवी के नाम से काफ़ी प्रसिद्ध एक हिंदू मंदिर है। माता मनसा देवी मंदिर शिवालिक की तलहटी में गांव बिलासपुर में करीब 100 एकड़ में फैला हुआ है। पंचकुला हरियाणा में स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। यह माता का मंदिर शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी (बिलासपुर, पंचकुला) में स्थित है। पंचकुला में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के महाराजा गोपाल सिंह ने साल 1811 ई. और 1815 के बीच में करवाया था। श्री माता मनसा देवी मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहाँ पर माता सती का मस्तिष्क गिरा था, जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया गया। पंचकुला में स्थित श्री माता मनसा देवी का मंदिर 51 शक्ति- पीठों में से एक है। यह मंदिर अपने आप में ही सबसे प्राचीन है और कुछ ख़ास भी। ऐसा कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु अथवा भक्तगण सच्चे मन से माता के दरबार में पहुँचता है, माता उसकी हर प्रकार की मनोकामना को ज़रूर पूरा करती है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं, तो आप निःसंदेह घूमने जाएँ। आप अगर इन दिनों घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह कहानी आपके लिए हैं। आप बेशक सही जगह और सही प्लेटफॉर्म पर आए हैं। यकीनन अगर आप घुमक्कड़ी करने के शौकीन हैं और कहीं घूमना जाना चाहते हैं तो आप हरियाणा में माता मनसा देवी के मंदिर दर्शन कर आईए।
यह स्थान भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। ये वो जगह है, जहाँ माता सती का मस्तिष्क गिरा था। चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू होने वाली है। इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस मौके पर भारत देश के हर मंदिर में उत्सव का माहौल रहता है। माँ दुर्गा की पूजा/आराधना भक्ति-भाव के साथ सभी जगहों पर की जाती है। हालांकि अगर आप भी इस नवरात्रि घुमक्कड़ी करने का योजना बना रहे हैं, लेकिन जीवन में काफ़ी अस्त-व्यस्तता है, तो जीवन में सकरात्मक परिवर्तन, शांति की अनुभूति के लिए आपको माता रानी के एक ऐसे मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं, जो वहाँ जाने वाले हर भक्तों के दिलों में बसा है। भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह माता के 51 शक्तिपीठ में से एक है, जो हरियाणा, पंचकुला में स्थित है। दर असल इस मंदिर का इतिहास काफ़ी पुराना है। ऐसा कहा जाता हैं कि जब माता सती के टुकड़े हुए, तो उनका मस्तिष्क इसी स्थान पर गिरा था। जिसके बाद यहाँ श्री माता मनसा देवी मंदिर का निर्माण हुआ। ख़ासतौर पर नवरात्रि के महीनों में मनसा देवी मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहता है। यहाँ आने के बाद यह मंदिर शांति की अनुभूति का एहसास कराती है, यहाँ श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिलती है। पंचकुला (हरियाणा) में स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो सच्चे मन से जो श्रद्धालु कुछ मांगता है, तो उसकी हर तमन्ना या मुराद पूरी होती है।
पंचकुला, हरियाणा में स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के महाराजा गोपाल सिंह ने 1811 और 1815 के बीच करवाया था। ऐसा कहा जाता है कि उस समय महाराज ने मनोकामना मांगी। उनकी मनोकामना पूरी हो गई। उसके बाद महाराजा गोपाल सिंह ने मंदिर बनवाया। उस समय उनके महल से लेकर मंदिर तक लंबी गुफ़ा थी। दर असल ऐसा कहा जाता हैं कि मनसा देवी भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री इनका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ। यहीं कारण है कि इन्हें मनसा देवी कहा जाता है। महाभारत के मुताब़िक इनका वास्तविक नाम 'जरत्कारु' है। हालांकि मंदिर में माता की मूर्ति के आगे तीन और पिंडियां हैं, जिन्हें माता का ही स्वरूप माना जाता है। ये तीन पिंडियां महालक्ष्मी, सरस्वती और मनसा देवी का स्वरूप हैं। मंदिर की परिक्रमा करते समय गणेश, हनुमान,वैष्णो देवी, भैरव की मूर्ति, द्वारपाल और शिवलिंग देखने को अमूमन मिलती हैं। आपको बता दें कि पंचकुला, हरियाणा के बिलासपुर गांव में स्थित यह मंदिर देश के सबसे खूबसूरत धार्मिक स्थलों में से एक है, जो 51 शक्तिपीठों में से एक है।
आप इस मंदिर तक पहुँचने के लिए आप ट्रेन और बस की मदद से यात्रा कर सकते हैं।पंचकुला में प्रसिद्ध शक्तिपीठ का जिक्र करें तो मनसा देवी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।दूसरी तरफ मनसा शब्द का शाब्दिक अर्थ हैं " मन की इच्छा "। मान्यता है कि यहाँ आने वाले हर भक्तों की मुराद पुरी होती है।
हरियाणा के पंचकुला में स्थित यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि करोड़ों लोगो की अटूट आस्था का केंद्र है।श्री माता मनसा देवी मंदिर का सबसे रहस्यमयी रिवाज है— पेड़ पर धागा बांधना। भक्त अपनी मनोकामना मांगकर एक धागा बांध देते हैं। और जब उनकी तमन्ना पूरी हो जाती है, तो वे फिर से मंदिर आकर वहीं धागा खोलते हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री और नागों की देवी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि माता अपने भक्तों को सर्पों और विष से भी रक्षा करती हैं। इसी कारण माता को "मनसा देवी" कहा जाता है - यानि मन की इच्छा पूरी करने वाली देवी। हर साल नवरात्रि के समय यहाँ विशाल मेला का आयोजन किया जाता है।
लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते हैं और पूरा मंदिर भक्ति के रंग में डूब जाता है। हालाँकि आज भी लाखों लोग मानते हैं कि माता मनसा देवी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। शायद यही कारण है कि पंचकुला का यह माता मनसा देवी मंदिर आज भी आने वाले लाखों भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्रों में से एक है।अगली बार जब आप घुमने के लिए पंचकुला जाएँ..एक बार माता मनसा देवी के दरबार में जरूर जाइए।क्योंकि कहा जाता है कि यहाँ सच्चे दिल से माँगी गई मुरादें पूरी होती है।माता के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।शायद यहीं कारण है कि आज भी लाखों लोग माता मनसा देवी मंदिर में पूरी श्रद्धापूर्वक माथा टेकने आते हैं।
✍️✍️✍️✍️ @GAURAV JHA
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