प्रशस्त करता सही राह मानवों के लिए,किताब है एक वरदान।।
हौसला रख मंज़िल की तरफ अगर तुम्हें बढ़ना है,
चुनों सही राह,पथिक बनकर जीवन में चलना है।।
पहाड़ काटकर माउंटेन मेन मांझी ने बनाया रास्ता,
रख जज्बा कुछ कर गुजरने की, तुम्हें करना होगा।।
आफ़ताब की तरह चमकने के लिए तुम्हें भी जलना होगा,
कदम से कदम मिलाकर अपने कर्तव्य-पथ पर चलना होगा।
आंधियां क्या रोकेगी रास्ता, हवा का रूख तू मोड़ सकता है,
मंज़िल की राहों में खड़ा हो गर,कोई पहाड़ उसे तोड़ सकता है।।
'ए गौरव' दीपक बनकर जलना होगा,
कर्तव्य पथ पर सदा तुम्हें चलना होगा।।
रख हौसला,आफ़ताब बनकर जलना होगा,
क़दम मिलाकर कर्तव्य-पथ पर चलना होगा।।
लाख झंझावतें और विपदाएँ आएं जीवन में हटाना होगा,
समंदर क्या रोकेगी रास्ता,नदियों को खुद राह बनाना होगा।
@GauravJha
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