अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है, ज़रा आम लोगों को भी हमेशा क़दम बढ़ाना है। अपने भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए, मातृभूमि के खातिर जनवासी को बीड़ा उठाना है। अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है, ज़रा आम लोगों को भी हमेशा क़दम बढ़ाना है।। मिलेगें एकजुट होकर तब देश हमारा स्वच्छ होगा, जन-जन भारतवासी सब रोज़ तभी स्वस्थ होगा। आओं मिलकर जन-जन को यही बात समझाना है। अपने इस पुण्य धरा के बारे में सबको कुछ बताना है। अपने पावन मातृभूमि को हमें स्वच्छ बनाना है, ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ बढ़ाना है।। सुख-समृद्धि, खुशियां अगर अपने घर-घर लाना है, आओ मिलकर प्रण करें सब भारत को ऊंचा उठाना है। स्वस्थ रहेंगे सभी इस भूमि पर तब पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, हर मानवजाति यही बात सबको हमें ज़रा कहना है।। अपने पावन मातृभूमि को रोज़ हमें स्वच्छ बनाना है, ज़रा आम लोगों को भी एक-एक हाथ ज़रा बढ़ाना है।। अपने देश की गंगा, यमुना,ब्रह्मपुत्र आदि नदियों को आओ मिलकर हम सबको इसे रोज़ चमकाना है, दिन-प्रतिदिन मलीन होने से हम सबको बचाना है। स्वच्छ रहे...
Gaurav Jha is a signature of Kalam who is a litterateur as well as a skilled speaker, leader, stage operator and journalist. His poems, articles, memoirs, story are being published in many newspapers and magazines all over the country. At a very young age, on the basis of his authorship, quality,ability.he has made his different fame and his identity quite different in the country. यह ब्लॉग यात्रा,इतिहास,शिक्षा और साहित्य से जुड़ी रोचक कहानी और जानकारी साझा करता है.....