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Showing posts from May, 2018

गजल -- इंतजार

देख रहा हूँ,तेरी राह वर्षो से कभी तो हँस के सलाम दे दो, मेरे हजारों खतों के बदले छोटा ही सही,कोई पैगाम दे दो।       मेरे अनगिनत अदब देख ,       तुम भी थोड़ा इन्कलाम दे दो,       इस मर रहमे मुहब्बत का कोई नाम दे दो।       मेरे इंतजारों का कोई मुकाम दे दो। मदहोश कर दें,मेरे रूह तक को,  अपने आँखों का वो  सिलाजाम दे दो, डूब जाऊं मैं तुझमें कहीं, ऐसी कोई हंसी शाम दे दो, इस मर रहमे मोहब्बत का कोई नाम दे दो, मेरे इंतजारों का कोई मुकाम दे दो।। इस दर्द के सिलसिले को अब विराम दे दो, अधूरी सी मेरी कहानी का कोई आयाम दे दो, थकने लगी है,अब आँखें मेरी, अपनी बाँहों में मुझे आराम दे दो, इस मर रहमे मोहब्बत का कोई नाम दे दो, मेरे इंतजारों का कोई मुकाम दे दो। पूजा है,जिसे रात दिन अपने खुदा की तरह, जो तुममें दिखता वो मेरा निजाम दे दो, इस मर रहमे मुहब्बत का कोई नाम दे दो, मेरे इंतजारों का कोई मुकाम दे दो।।।           ...

बेहतर शिक्षा पद्धति से देश का विकास

“हमारी मनोवृत्ति का निर्माण हमारे जीवन, हमारे आचरण के अनुरूप ही होता है। हमारे जीवन तथा आचरण का मूल आधार है हमारी शिक्षा।”     किसी देश का विकास उस देश की शिक्षा प्रणाली पर ...

कविता -- यादें

क्यों मेरी यादों को तुम भूलाने लगे हो, चुपके-चुपके सपनों में, रूलाने लगे हो, आँखों से खतम आँसू भी हुए अब मेरे,                              जाने को कहके तू दिल दुखाने लगे हो,   ...

एक सज्जन से वार्तालाप

आज एक सज्जन पुरूष से मुलाकात हुई। पहनावा देखकर मानों ऐसा लग रहा था कि वह किसी रईस परिवार के है।दरअसल कुछ देर तक वार्तालाप चली।वार्तालाप करने के क्रम में उन्होंने कहा,विदे...

लेख-- साहित्य जगत के लौह पुरूष दादा माखनलाल चतुर्वेदी

आज हिन्दी के कालजयी और बहुआयामी व्यक्तित्व ,अग्रगण्य साहित्यकार दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी की रचना 'एक भारतीय आत्मा' के बारे में अध्ययन कर रहा था।लगभग कुछ पन्नों को ही पढ़...

दर्द भरी शायरी

आपके हुस्न की क्या तारीफ करना चाहिए, थोड़ी सी होठों पे मुस्कान रखना चाहिए, कुछ अल्फाज लिखता हूँ, दिल में कुछ जज्बात रखता हूँ, लिखा ना हो,जो किसी ने अब तक, ऐसा कुछ लिखूं गीत लिखूं,...

लेख लिखने का तरीका

एक अच्छा पाठक सदैव कुछ -न-कुछ पढ़ना चाहता है चाहे लेख हो या लघु लेख।परन्तु पत्र-पत्रिकाओं में हम ज्यादातर छपने वाले समाचार, कहानी ,उपन्यास, कविता,लेख के बारे में यह कहा जाता ह...

लेख -- जीवन क्या है।

जरूरत आज इस बात की है कि हम किस हम इस बात को समझ लें कि आख़िर हमारे जीवन का ध्येयबिंदु है कौन-सा?और यदि हरेक मानवजाति को एक बार ध्येयबिंदु का पता लग गया तो फिर कुछ नहीं,यकीनन हम कह सकते है कि समयनुसार  सभी व्यक्तियों में ठीक से सही दिशा की ओर अग्रसर होगा।जैसे,प्रातःकाल छोटे-छोटे नन्हें हाथों वाले बच्चे स्कूल जाते है।दरअसल उसे मंजिल का पता होता है।आखिर जाना कहाँ है?बशर्ते कुछ बच्चे कार से जाता है,कुछ मोटरसाइकिल से और कुछ बच्चे पैदल चलता,कोई बड़े-बुज़ुर्गों ,बुद्धिजीवियों को प्रणाम करते हुए चलता है।निश्चिततौर पर सबका चलने का तरीका एक-दूसरे से अलग-अलग होता है।लेकिन यहाँ पर कहना चाहूँगा, पैदल चलने का मजा आनंददायी होता है।दरअसल पैदल चलने के क्रम में कई लोगों से रास्तें में वार्तालाप होती हैं,कुछ सीखते हुए चलते है।पैदल चलने के क्रम में बाहर कई सारे चीजों पर बारीक़ी से नजर पड़ती है,जिससे हमें बहुत कुछ अनुभव मिलता है।यकीनन जिस पर आम लोगों की नजर नहीं पड़ ती है।और नजर पड़ भी गई ,तो वे उन चीजों को इग्नोर कर देते है।लेकिन उन्हें पता नहीं कि वही छोटी-छोटी चीजें काफ़ी महत्वपूर्ण बन जाती है।सही ...

लेख -- साहित्य जन्म से ही हमारे साथ है।

साहित्य जन्म से ही हमारे साथ है।बचपन में भी मां की लोरी,दादी-नानी की कहानियाॅ मन को भाती हैं।सार्थक या निरर्थक शब्दों के जोड़ तोड़ से बोलने का अभ्यास हो जाता है।शब्द आकर्ष...

लेख -- प्रेम से अमरत्व की प्राप्ति

प्रेम का अर्थ तो हमेशा समर्पण है।वो भी किसी के साथ निस्वार्थ भाव के साथ किया गया समर्पण ही प्रेम की परिभाषा है।चाहे वो प्रेम भगवान के प्रति हो,या रामायण में राम,लक्ष्मण,भरत ...

कवि सम्मेलन

कल नारायणी साहित्य अकादमी नई दिल्ली की संस्था के त्तत्वाधान मे महादेवी वर्मा के पुण्यतिथि पर बेगूसराय मे आयोजित कर्मचारी भवन में जाने का सुनहरा मौका मिला।विशेषतौर पर न...

मुक्तक

धरती पर जब जब बढ़ते रहे हैं , पाप लेकर अवतार प्रभु करते रहे संहार, मिलता रहा सदा पापियों को ही शाप, फिर भी क्यूं न रुकता घातक शब्दों का प्रहार।। <script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script> <script>   (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({     google_ad_client: "ca-pub-6937823604682678",     enable_page_level_ads: true   }); </script>

मुक्तक/कवि गौरव झा

देश में पाप करके घातक बने बैठे है, देश के विकास में बाधक बने बैठे है, भक्तों से कराके अपनी ही पूजा यहाँ, शैतान बना यहाँ, साधक बने बैठे हैं!!!!                    ----- @&#128144;कवि गौरव झा

लेख-- जनता अब है समझदार।

राजनीति पर से धर्म का अंकुश हटा तो वह निरंकुश हो गई।युद्ध,प्यार और राजनीति में सब कुछ उचित-अनुचित चलता है।इस मान्यता ने उपरोक्त तीनों ही तथ्यों को निकृष्ट स्तर का बना डाला...

लेख -- राजनेताओं का अंत अति संकट

जिनके हृदय में जनता के दु:ख-दर्द दूर करने की कसक हो,जिनका अंत:करण दुखियों के दु:ख से द्रवित हो जाता हो,जिन दिलों में ब्राह्मणत्व एवं क्षत्रिय की भावनाएँ हिलोरें ले रही हों,उन...